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My Dear Hindi

…for the love of this divine language

हिंदी मेरी जान !!!

Today is Hindi Diwas, hence reblogging my poem on Hindi language. Hindi lovers to read and suggest.

My Dear Hindi

Image result for hindi Picture Source: Canberra Hindi School


हिंदी मेरी जान !!!

जब पहली आँख खुली, हमने हिंदी को अपने निकट पाया
जबसे सुनना सीखा, हमारे नन्हे कानों में इसने रस घोला
हिंदी सुन-सुन कर हम हँसते, हिंदी सुन-सुन रोते
सुना इसको हमने, माँ की मीठी लोरी में
ऐसे ही तो हिंदी ने हमें दिन रात सुलाया और जगाया
बस, तब हम जानते न थे के ये हिंदी है…

माँ जब बाँहें फैला कर, हिंदी बोल कर कहती
“आजा मेरे बच्ची…आजा! आजा!! आजा!!!”
हम हिचकिचाते, ठुमक-ठुमक कर माँ के पास जाते
ऐसे ही तो हिंदी ने हमें चलना-फिरना था सिखाया
बस, तब हम जानते न थे के ये हिंदी है…

हमारा पहला शब्द है यह, पहली तोतली आवाज़
पानी, दुदु (दूध), लोटी (रोटी), नीनी (नींद), काका
ये मीठे शब्द ना होते, तो हम दिल की बात कैसे बताते?
कैसे हम कुछ खाते-पीते, कैसे हम सो पाते?
ऐसे ही तो हिंदी ने हमको बातें करना सिखाया
बस, तब…

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माँ की सिसकियाँ, माँ का विलाप

4 Sentenced to 20 Years in Jail for Gangrape 

 

हाय मेरी बच्ची !!!
मेरी भोली मासूम बच्ची
कैसे सहन किया होगा सब उसने
कितना रोई होगी! कितना चिल्लाई होगी!
चिलाते चिल्लाते थक गयी होगी

शायद बेहोश हो गयी हो
शायद मुझ अभागी माँ को याद किया हो
क्या मालूम कब दम तोडा हो उसने
जब वहशियों ने लूटा उसको तब?
या फिर जब सर को फोड़ डाला!!

किस माँ के कपूत हैं ये दुष्ट दरिंदे
मिलाओ तो सही मुझे इनकी माँ-बहन से!!
पूछूँ तो सही ऐसी कुप्पत्ति माओं से,
क्या खा कर पैदा किया था ऐसे दुष्टों को ?
अश्लील फिल्में देखी थी माँ ने, जब दुष्ट गर्भ में थे?
या उन्हें बचपन से मनमानी करने दी थी
क्या इनके पिता भी पर-स्त्री की इज़्ज़त नहीं करते?

मेरी बच्ची को लूट कर, कैसे ये दरिंदे
मज़े से अपने घर गए होंगे
माँ ने दुलार से चिंता जताई होगी
बेटा!  कितना थक कर आया है
ऐसा कह कर लाड़ से सुलाया होगा
लाहनत है ऐसे माता-पिता को
मुँह क्यों नहीं तोड़ देती इनकी मायें
सर फोड़ दें अपने घिनौने बच्चों का
जो दूसरों की बच्चियों का शिकार करते हैं

सामने आओ दरिंदो !! अपनी कायर शक्ल तो दिखाओ
आओ तुम्हारा मुँह तोड़ दूँ , फिर भूखे कुत्तों को खिलाऊँ
तुम्हारे घटिया बदन की बोटी बोटी को, चील कव्वों से नोचवाऊं
तुम मेरे हाथ तो आओ !! तुम मेरे हाथ तो आओ !!
हाथ आओ तो सही !!

~alka~

Just a reaction to Rohtak rape case and similar others. Now Shimla case in 2017

कोई हमें निर्धन न कहना

snapchat india

हमें निर्धन न कहना

हमें निर्धन न कहना
ना!! हम गरीब नहीं
हम तेज़ी से उभरते सितारे हैं
बहुत दूर तलक जायेंगे

पहले भी सर्वाधिक चमकदार ज्वाला थे हम
कुछ देर ज़माने की आँधियों से बुझ क्या गए
कि मंद-बुद्धि मद्धम दीये भी इतराने लगे
रोआब दिखाने लगे, हम पर तरस खाने लगे

देखो!! हमारी ओजस्वी चमक अभी बाकी है
अक्ल पहले भी तेज़ थी, आज भी प्रखर है
हम निर्धन कहाँ, अति-सुसंस्कृत बुद्धिमान हैं हम
सर्वगुण संपण … सबसे धनवान हैं हम

हाँ !! कुछ लेना है तो ले लो हमसे
कि ज्ञान का अद्भुत भंडार हैं हम भारतवंशी
नृत्य, संगीत, योग, कला, साहित्य, तकनीक
गणित-विज्ञान, हर क्षेत्र में माहिरत है अपनी

और फिर, तुम सब तो नए खिलाड़ी हो
आखिर कब तक करतब दिखाओगे
हमसे सीखोगे…तो बहुत आगे जाओगे
हमें साथ लेकर चलोगे, तब ही तो टिक पाओगे

~Alka Girdhar~

Written in good humor just after the recent Snapchat controversy.

कैसे करें पहचान?

 

कैसे करें पहचान?

इस बहु-तकनीकी आधुनिक युग में
रावण को तुरंत जलाना तो आसान
मगर यह तय कर पाना मुश्किल
कि कौन असली रावण है, कौन राम

सही और गलत के पैमाने बदल गए
अब तो सब कुछ ‘चलता है’ जनाब
हंस आजकल चुग रहा है दाना दुनका
और कमबख्त कौवा मोती खाता है

सच्चाई कलंकित, झूठ बन गए सच्च
लेकिन किसी का क्या जाता है?
स्पष्ट है ये, फिर भी वही है प्रश्न
मुश्किल है पहचान, कौन रावण और कौन राम?

मगर प्रकृति के नियम और पैनी आँख से
कहाँ कोई बच पाता है, और न जाने क्यों
दिल को अब भी यकीन है के
राम या रावण, सब का “ख़ास दिन” आता है

 

© 2016 Alka Girdhar

This is a satire not on any person but the whole era and times, esp. the political scenario.

कुछ बातें जगत-जननी से

 

कुछ बातें जगत – जननी से

एक आम औरत हूँ मैं
हे माँ दुर्गे !! मुझे तुम
अपने जैसा बना दो

दो हाथ पूरे नहीं पड़ते
ना कार्यों में घर-बाहर के
ना दुष्टों से बचाव के लिए
कई हस्त्त (हाथ) दे दो मुझे
एक नयी स्फूर्ति ला दो

रहूँ स्वस्थ और प्रफुलित
कार्य अपने सिद्ध करूँ
फिर दूसरों के काम आऊँ
ना रहूँ किसी पर भी निर्भर
सम्पूर्णता इतनी दिला दो

उन्मुक्त और निर्भय बना दो
तन से, और तहे अन्तर्मन से
भय ना हो अब कभी किसी का
रहूँ अटल अपने निर्णय पर
ऐसी शक्ति मुझ में ला दो

आँधियाँ कितनी भी आएं
हम कभी ना हों विचलित
धूप में भी, छाँव में भी
मन सदा  रहे आनंदित
सहनशक्ति ऐसे बढ़ा दो

आम को कुछ ख़ास कर दो (साधारण को विशेष कर दो)
माँ!! अबकी बार…आप मुझे
कुछ-कुछ अपने जैसा बना दो

© 2016 Alka Girdhar

 

Wrote this poem as a voice of a common woman who needs to be courageous and fearless, like the Goddess.

हिंदी मेरी जान !!!

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Picture Source: Canberra Hindi School


हिंदी मेरी जान !!!

जब पहली आँख खुली, हमने हिंदी को अपने निकट पाया
जबसे सुनना सीखा, हमारे नन्हे कानों में इसने रस घोला
हिंदी सुन-सुन कर हम हँसते, हिंदी सुन-सुन रोते
सुना इसको हमने, माँ की मीठी लोरी में
ऐसे ही तो हिंदी ने हमें दिन रात सुलाया और जगाया
बस, तब हम जानते न थे के ये हिंदी है…

माँ जब बाँहें फैला कर, हिंदी बोल कर कहती
“आजा मेरे बच्ची…आजा! आजा!! आजा!!!”
हम हिचकिचाते, ठुमक-ठुमक कर माँ के पास जाते
ऐसे ही तो हिंदी ने हमें चलना-फिरना था सिखाया
बस, तब हम जानते न थे के ये हिंदी है…

हमारा पहला शब्द है यह, पहली तोतली आवाज़
पानी, दुदु (दूध), लोटी (रोटी), नीनी (नींद), काका
ये मीठे शब्द ना होते, तो हम दिल की बात कैसे बताते?
कैसे हम कुछ खाते-पीते, कैसे हम सो पाते?
ऐसे ही तो हिंदी ने हमको बातें करना सिखाया
बस, तब हम जानते न थे के ये हिंदी है….

मित्रों से हो बातचीत, या फिर प्रियतम से इकरार
हिंदी ने ही मुमकिन किया प्यार का इज़हार
तब से अब तक, क्षण-क्षण, दिन-रात साथ है ये मेरे
जागती हों आँखें, या हो स्वप्न-लोक में विचरण
वास्तविक दिनचर्या , या कोई गहरी सोच-विचार
हरदम मेरे कितने निकट रहती है यह हिंदी
लेकिन…अब हम जानते हैं, के ये हिंदी है….

के ये है मेरी अभिलाषा, मेरी प्यारी मातृ-भाषा
मेरे पूर्वजों की बोली, माता-पिता की प्रिय भाषा
भाई बहिन की ज़ुबान, मेरे बेटे की जिज्ञासा
तुम्हारी भाषा, हमारी भाषा
सब भारत वासियों की प्यारी हिंदी भाषा
आओ इसको प्यार करें हम, इसका खूब प्रचार करें हम
कितना इसने दिया हमें, अब इसको भी कुछदें हम

एक बात हम रखें याद….हमारे बगैर है यह सम्पूर्ण
हम ही इसके बिना, हो जाते हैं कितने आधे-अधूरे
है ये हमारा आस्तित्व, और हमारी पहचान
हिंदी हमारी जान…हिंदी मेरी जान

~अलका गिरधर ~  Alka Girdhar ~

I wrote this poem on Hindi Diwas –  14th of Sept 2014.  Sharing it on 14th September 2016 as a first post on my new blog.

Hindi and Punjabi are two native Indian languages I grew up speaking, while English also does help us multi-linguals or polyglots come together.

Please share your views about this blog as well as the posts, so that I can improve my work.

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