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Picture Source: Canberra Hindi School


हिंदी मेरी जान !!!

जब पहली आँख खुली, हमने हिंदी को अपने निकट पाया
जबसे सुनना सीखा, हमारे नन्हे कानों में इसने रस घोला
हिंदी सुन-सुन कर हम हँसते, हिंदी सुन-सुन रोते
सुना इसको हमने, माँ की मीठी लोरी में
ऐसे ही तो हिंदी ने हमें दिन रात सुलाया और जगाया
बस, तब हम जानते न थे के ये हिंदी है…

माँ जब बाँहें फैला कर, हिंदी बोल कर कहती
“आजा मेरे बच्ची…आजा! आजा!! आजा!!!”
हम हिचकिचाते, ठुमक-ठुमक कर माँ के पास जाते
ऐसे ही तो हिंदी ने हमें चलना-फिरना था सिखाया
बस, तब हम जानते न थे के ये हिंदी है…

हमारा पहला शब्द है यह, पहली तोतली आवाज़
पानी, दुदु (दूध), लोटी (रोटी), नीनी (नींद), काका
ये मीठे शब्द ना होते, तो हम दिल की बात कैसे बताते?
कैसे हम कुछ खाते-पीते, कैसे हम सो पाते?
ऐसे ही तो हिंदी ने हमको बातें करना सिखाया
बस, तब हम जानते न थे के ये हिंदी है….

मित्रों से हो बातचीत, या फिर प्रियतम से इकरार
हिंदी ने ही मुमकिन किया प्यार का इज़हार
तब से अब तक, क्षण-क्षण, दिन-रात साथ है ये मेरे
जागती हों आँखें, या हो स्वप्न-लोक में विचरण
वास्तविक दिनचर्या , या कोई गहरी सोच-विचार
हरदम मेरे कितने निकट रहती है यह हिंदी
लेकिन…अब हम जानते हैं, के ये हिंदी है….

के ये है मेरी अभिलाषा, मेरी प्यारी मातृ-भाषा
मेरे पूर्वजों की बोली, माता-पिता की प्रिय भाषा
भाई बहिन की ज़ुबान, मेरे बेटे की जिज्ञासा
तुम्हारी भाषा, हमारी भाषा
सब भारत वासियों की प्यारी हिंदी भाषा
आओ इसको प्यार करें हम, इसका खूब प्रचार करें हम
कितना इसने दिया हमें, अब इसको भी कुछदें हम

एक बात हम रखें याद….हमारे बगैर है यह सम्पूर्ण
हम ही इसके बिना, हो जाते हैं कितने आधे-अधूरे
है ये हमारा आस्तित्व, और हमारी पहचान
हिंदी हमारी जान…हिंदी मेरी जान

~अलका गिरधर ~  Alka Girdhar ~

I wrote this poem on Hindi Diwas –  14th of Sept 2014.  Sharing it on 14th September 2016 as a first post on my new blog.

Hindi and Punjabi are two native Indian languages I grew up speaking, while English also does help us multi-linguals or polyglots come together.

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