कुछ बातें जगत – जननी से

एक आम औरत हूँ मैं
हे माँ दुर्गे !! मुझे तुम
अपने जैसा बना दो

दो हाथ पूरे नहीं पड़ते
ना कार्यों में घर-बाहर के
ना दुष्टों से बचाव के लिए
कई हस्त्त (हाथ) दे दो मुझे
एक नयी स्फूर्ति ला दो

रहूँ स्वस्थ और प्रफुलित
कार्य अपने सिद्ध करूँ
फिर दूसरों के काम आऊँ
ना रहूँ किसी पर भी निर्भर
सम्पूर्णता इतनी दिला दो

उन्मुक्त और निर्भय बना दो
तन से, और तहे अन्तर्मन से
भय ना हो अब कभी किसी का
रहूँ अटल अपने निर्णय पर
ऐसी शक्ति मुझ में ला दो

आँधियाँ कितनी भी आएं
हम कभी ना हों विचलित
धूप में भी, छाँव में भी
मन सदा  रहे आनंदित
सहनशक्ति ऐसे बढ़ा दो

आम को कुछ ख़ास कर दो (साधारण को विशेष कर दो)
माँ!! अबकी बार…आप मुझे
कुछ-कुछ अपने जैसा बना दो

© 2016 Alka Girdhar

 

Wrote this poem as a voice of a common woman who needs to be courageous and fearless, like the Goddess.

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