कैसे करें पहचान?

इस बहु-तकनीकी आधुनिक युग में
रावण को तुरंत जलाना तो आसान
मगर यह तय कर पाना मुश्किल
कि कौन असली रावण है, कौन राम

सही और गलत के पैमाने बदल गए
अब तो सब कुछ ‘चलता है’ जनाब
हंस आजकल चुग रहा है दाना दुनका
और कमबख्त कौवा मोती खाता है

सच्चाई कलंकित, झूठ बन गए सच्च
लेकिन किसी का क्या जाता है?
स्पष्ट है ये, फिर भी वही है प्रश्न
मुश्किल है पहचान, कौन रावण और कौन राम?

मगर प्रकृति के नियम और पैनी आँख से
कहाँ कोई बच पाता है, और न जाने क्यों
दिल को अब भी यकीन है के
राम या रावण, सब का “ख़ास दिन” आता है

 

© 2016 Alka Girdhar

This is a satire not on any person but the whole era and times, esp. the political scenario.

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